Kidney Disease cured patient : Mr. Adinath Shete

Kidney Disease treatment by Modern Homeopathy……the curative line of treatment

Patient: Mr. Adinath Shete
Age: 75 Years

Diagnosed case of : Liver Cirrhosis

Reports before Modern Homeopathy treatment

Report I : Before treatment on dated 08.05.2012

Report 08.05.2012

Report 08.05.2012

MODERN HOMEOPATHY treatment started on Aug 2012

Reports After Modern Homeopathy treatment

Report II : After treatment on dated 09.08.2013

Report 09.08.2013

Report 09.08.2013

Report 10.08.2013

Report 10.08.2013

Report 11.08.2013

Report 11.08.2013

Report 11.02.2014

Report 11.02.2014

since 2 years they have stop the medication of Modern homeopathy and he is living normal and happy life without any side effects and operation.
Latest Report on Dated 20.05.2017

Report 20.05.2017

Report 20.05.2017

For More details visit MODERN HOMEOPATHY……the curative line of homeopathic treatment

Liver Cirrhosis cured patient : Mr. Hemant Shitole

Modern Homeopathy‘s successive curative treatment on LIVER.

Published Report’s step-by-step, How it cures by Modern Homeopathy……the curative line of treatment

Before Modern Homeopathy Treatment : Total Bilirubin 28.68

Report – I : Total Bilirubin 28.68

Dated : 25.11.2015

Dated : 25.11.2015

After Modern Homeopathy Treatment

Report – II : Total Bilirubin 16.69

Dated : 02.12.2015

Dated : 02.12.2015

Report – III : Total Bilirubin 12.86

Dated : 05.12.2015

Dated : 05.12.2015

Report – IV : Total Bilirubin 6.93

Dated : 12.12.2015

Dated : 12.12.2015

Report – V : Total Bilirubin 2.81

Dated 19.02.2016

Dated : 19.02.2016

Report – VI : Total Bilirubin 2.15

Dated : 05.04.2016

Dated : 05.04.2016

Total Bilirubin Recovered from 28.68 to 2.15…….Modern Homeopathy is the curative line of homeopathic treatment

Liver cirrhosis cured Patient : Dr. Nilesh Jagtap

Modern Homeopathy‘s successive curative treatment on LIVER.

Published Report’s step-by-step, How it cures by Modern Homeopathy……the curative line of treatment

Report – I Before Modern Homeopathy Treatment: Total Bilirubin 37.50
3.6.15

Report – II Before Modern Homeopathy Treatment: Total Bilirubin 44.01
10.6.15

Report – I After Modern Homeopathy Treatment: Total Bilirubin 10.02
10.7.15

Report – II After Modern Homeopathy Treatment: Total Bilirubin 6.8
27.10.15

Modern Homeopathy……..it is the curative line of homeopathic treatment

HEART disease curative treatment by Modern Homeopathy – II : Dr. Vijaykumar Mane (CEO, Modern Homeopathy)

Modern Homeopathy helps you for Awareness, Guidance and Curative treatment on HEART disease with Dr. Vijaykumar Mane (CEO, Modern Homeopathy). Now you can enjoy Healthy and Happy life with Modern Homeopathy…..it is curative line of treatment for Cancer, Kidney, Liver Cirrhosis, Heart, Diabetes, Nephritic Syndrome, Allergy, Rheumatic Diseases, Arthritis, Asthma, Blood and Brain disorders, Gastro-Intestinal Problems, Chronic failure and other incurable diseases.

HEART disease curative treatment by Modern Homeopathy – 2A : Dr. Vijaykumar Mane (CEO, Modern Homeopathy)

HEART disease curative treatment by Modern Homeopathy – 2B : Dr. Vijaykumar Mane (CEO, Modern Homeopathy)

CANCER : विश्व कैंसर दिवस (4 th February)

CANCER

CANCER

विश्व भर में कैंसर एक ऐसी बीमारी है ,जिसमे सबसे ज्यादा लोगो की मौत होती है | आज विश्व भर में सबसे ज्यादा मरीज इसकी चपेट में है |इसी कारण विश्व स्वास्थ संगठन ने हर साल ४ फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया ,ताकी इस भयावह बीमारी के प्रति लोगो में जागरूकता आए।

विश्व कैंसर दिवस प्रत्येक वर्ष 4 फ़रवरी को मनाया जाता है। आधुनिक विश्व में कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे सबसे ज़्यादा लोगों की मृत्यु होती है। विश्व में इस बीमारी की चपेट में सबसे अधिक मरीज़ हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद कैंसर के मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। ऐसा माना जा रहा है 2030 तक कैंसर के मरीजों की संख्या 1 करोड़ से भी अधिक हो सकती हैं।

कैंसर एक किस्म की बीमारी नहीं होती, बल्कि यह कई रूप में होता है। कैंसर के 100 से अधिक प्रकार होते हैं। अधिकतर कैंसरों के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमें वे शुरू होते हैं- उदाहरण के लिए, बृहदान्त्र में शुरू होने वाला कैंसर पेट का कैंसर कहा जाता है, कैंसर जो कि त्वचा की बेसल कोशिकाओं में शुरू होता है बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है।विश्व भर में कैंसर एक ऐसी बीमारी है ,जिसमे सबसे ज्यादा लोगो की मौत होती है |

हम सभी के दिल और दिमाग में यह बीमारी मृत्यु के पर्यायवाची के रूप में अंकित हो गई है | अज्ञानता के कारण हम इस बीमारी को सही स्टेज पर नही पहचान पाते ,जिस कारण मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है | यह इतनी भयावह नही , जितना हम मानते है .

हमारा शरीर असंख्य कोशिकाओ से बना है | यह कोशिकाएं आवश्यकता अनुरूप अत्यंत ही नियंत्रित प्रणाली के द्वारा विभाजित होती है और जब आवश्यकता नही होती है ,तब यह विभाजित नहीं होती |

इन्ही कोशिकाओ में कभी आनुवंशिक बदलाव आने से इनकी नियंत्रित विभाजन प्रणाली पूर्णरूप से खत्म हो जाती है और फिर हमारी कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित होने लगती है ,कोशिकाओ के इस अनियंत्रित विभाजन को हम कैंसर कहते है |

कैंसर शुरुवाती अवस्था में अपने प्राथमिक अंग में रहता है , धीरे -धीरे यह रक्त धमनियों के द्वारा बहकर दूसरे अंगो में फ़ैल जाता है | इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस कहते है ,यह बीमारी इसी कारण होती है |

असल में कैंसर का फैलाव चार चरणो में होता है | पहला स्टेज में कैंसर शुरुवाती अवस्था में अपने प्राथमिक अंग में सिमित रहता है और अंतिम चरण में यह बीमारी शरीर के दूसरे अंगो में फ़ैल जाती है |

विश्व कैंसर दिवस हर वर्ष कुछ विशेष थीम पर मनाया जाता है;

2015 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “हमारे सीमाओं के बाहर नहीं है”।

2016 के विश्व कैंसर दिवस का थीम है “हम कर सकते हैं। मै कर सकता हूँ।”।

कैंसर के मुख्य श्रेणियां

कार्सिनोमा: ऐसा कैंसर जो कि त्वचा में या उन ऊतकों में उत्पन्न होता है, जो आंतरिक अंगों के स्तर या आवरण बनाते हैं।

सारकोमा: ऐसा कैंसर जो कि हड्डी, उपास्थि, वसा, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं या अन्य संयोजी ऊतक या सहायक में शुरू होता है।

ल्युकेमिया: कैंसर जो कि रक्त बनाने वाले अस्थि मज्जा जैसे ऊतकों में शुरू होता है और असामान्य रक्त कोशिकाओं की भारी मात्रा में उत्पादन और रक्त में प्रवेश का कारण बनता है।

लिंफोमा और माएलोमा: ऐसा कैंसर जो कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं में शुरू होता है।
केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के कैंसर: कैंसर जो कि मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के ऊतकों में शुरू होता हैं।

कैंसर की उत्पत्ति
सभी प्रकार के कैंसर कोशिकाओं में शुरू होते है, जो शरीर में जीवन की बुनियादी इकाई होती हैं। कैंसर को समझने के लिए, यह पता लगाना उपयोगी है कि सामान्य कोशिकाओं के कैंसर कोशिकाओं में परिणत होने पर क्या होता है।

शरीर कई प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ये कोशिकाओं वृद्धि करती हैं और नियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं। कोशिकाएं जब पुरानी या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो वे मर जाती हैं और उनके स्थान पर नई कोशिकाएं आ जाती हैं।

हालांकि कभी कभी यह व्यवस्थित प्रक्रिया गलत हो जाती है। जब किसी सेल की आनुवंशिक सामग्री (डीएनए) क्षतिग्रस्त हो जाती है या वे बदल जाती हैं, तो उससे उत्परिवर्तन (म्युटेशन) पैदा होता है, जो कि सामान्य कोशिकाओं के विकास और विभाजन को प्रभावित करता है। जब ऐसा होता है, तब कोशिकाएं मरती नहीं, और उसकी बजाए नई कोशिकाएं पैदा होती हैं, जिसकी शरीर को जरूरत नहीं होती। ये अतिरिक्त कोशिकाएं बड़े पैमाने पर ऊतक रूप ग्रहण कर सकती हैं, जो ट्यूमर कहलाता है। हालांकि सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते, ट्यूमर सौम्य या घातक हो सकता हैं।

सौम्य ट्यूमर: ये कैंसर वाले ट्यूमर नहीं होते। अक्सर शरीर से हटाये जा सकते है और ज्यादातर मामलों में, वे फिर वापस नहीं आते। सौम्य ट्यूमर में कोशिकाएं शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलते।

घातक ट्यूमर: ये कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं, और इन ट्यूमर की कोशिकाएं आसपास के ऊतकों पर आक्रमण कर सकती हैं तथा शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। कैंसर के शरीर के एक भाग से दूसरे फेलने के प्रसार को मेटास्टेसिस कहा जाता है।

ल्युकेमिया: यह अस्थिमज्जा और रक्त का कैंसर है इसमें ट्यूमर नहीं।

कैंसर के कुछ लक्षण
1-स्तन या शरीर के किसी अन्य भाग में कड़ापन या गांठ।
2-एक नया तिल या मौजूदा तिल में परिवर्तन।
3-कोई ख़राश जो ठीक नहीं हो पाती।
4-स्वर बैठना या खाँसी ना हटना।
5-आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन।
6-खाने के बाद असुविधा महसूस करना।
7-निगलने के समय कठिनाई होना।
8-वजन में बिना किसी कारण के वृद्धि या कमी।
9-असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज।
10-कमजोर लगना या बहुत थकावट महसूस करना।

आमतौर पर, यह लक्षण कैंसर के कारण उत्पन्न नहीं होते। ये सौम्य ट्यूमर या अन्य समस्याओं के कारण पैदा हो सकते हैं। केवल डॉक्टर ही इनके बारे में ठीक-ठीक बता सकते हैं। जिसे भी ये लक्षण या स्वास्थ्य के अन्य परिवर्तन आते हैं, इसका तुरंत पता लगाने के लिए डॉक्टर से दिखाना चाहिए। आमतौर पर शुरुआती कैंसर दर्द नहीं करता यदि आपको कैंसर के लक्षण हैं, तो डॉक्टर को दिखाने के लिए दर्द होने का इंतजार न करें।

by “मॉडर्न होमिओपॅथी…..the curative line of homeopathic treatment”

Homeopathic Treatment Reverses Pathology : Kidney Patient Mr. Rian Papal

MODERN HOMEOPATHY‘s treatment
See how Homeopathic Treatment reverses Pathology .

Cortical Scarring and Mild Hydronephrosis disappeared totally and the size of Kidney also increased in a 7 years old child. He was suffering from High Grade Vesicoureteric Reflux .

Before Treatment-1

Report before Modern Homeopathy's Treatment

Report before Modern Homeopathy’s Treatment

Before Treatment-2

Report before Modern Homeopathy's Treatment 2

Report before Modern Homeopathy’s Treatment 2


Now After Modern Homeopathy‘s treatment it is reversed totally with normal Renal Functioning.

After Treatment-1

Report after Modern Homeopathy's treatment 1

Report after Modern Homeopathy’s treatment 1

After Treatment-2

Report after Modern Homeopathy's treatment 2

Report after Modern Homeopathy’s treatment 2

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Causes for Parkinson’s Disease

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Causes:
PD is a degenerative disorder of the central nervous system. Most of the PD cases are idiopathic (no cause).

A small proportion of cases can be attributed to known genetic factors.

Other factors such as environmental toxins, herbicides, pesticides and fungicides have been associated with the risk of developing PD no cause in proven.

Genetic Factors:
PD is non genetic disorder.

15% of individuals with PD have a first degree relative who has the disease.

At least 5% of people are now known to have forms of the disease that occur because of a mutation of one of severe specific genes.

Plantations in specific genes have been shown to cause PD.

These genes code for alpha-synuclein(SNCA) parkin(PRKN), Leucine-rich repeat kinase 2 (LRRK 2 or dardar in), PTEN- induced putative kinase 1 (PINK 1) DI-1 and ATPI3A2. In most cases, people with these mutations will develop PD. With the exception of LRRK2, they account for only a small minority of cases of PD. The most extensively studied PD related genes are SNCA and LRRK2 and Glucocerebrosidase (GBA) have been found to be risk factors for sporadic PD- Mutatoins in GBA are known to cause Gauchers disease.

Genome-wise association studies which search for PD mutated alleles with low penetrance in sporadic cases have now yielded many positive results.

SNCP Gene:
The role of the SNCA Gene is important in PD because the alpha synuclein protein is the main component of Lewy bodies.

SNCA is expressed throughout the mammalian brain, and enriched in presynaptic nerve terminals. Missense Mutations of the gene (in which a single nucleoid is changed) and duplications and triplications of the locus containing it have been found in different groups with familial PD.

Missense mutations in SNCA are rare.

Multiplications of the SNCA locus account for around 2% of familial cases. Multiplications of the SNCA have been found in asymptomatic carriers, which indicate that penetrance is incomplete or age dependent.

Level of alpha synuclein expression correlates with disease onset and progression with SNCA gene triplication advancing earlier and faster than duplication.

LRRK 2 Gene:
LRRK2 gene (PARK 8) encodes for a protein called dardarin.

The name dardarin was taken from a basque word for tremors because this gene was first identified in families from England and the North Spain.

A significant number of autosomal dominant Parkinsons Disease cases are associated with mutations in the LRRK2 gene.
Mutation in LRRK2 are the most common known cause of familial and sporadic PD, accounting for approximately 5% of the individuals with a family history of the disease.

There are many different mutations described in exists for a small number.

Mutations in the PINK 1, PRKN and DJ1 may cause mitochondrial dysfunction an element of both idiopathic and genetic PD.

Of related interest are mutations in the progranulin gene that have been found to cause corticobasal degeneration seen in dementia.

This could be relevant in PD cases associated with dementia.

GBA Genes:
Mutations in GBA are known to cause Gauchers disease.

Genome wide association studies, that search for mutated alleles with low penetrance in sporadic cases have now yielded many positive results mendelian genetics are not strictly observed in GBA mutations found in inherited Parkinsonism

Incidentally both gain of functions and loss of functions GBA mutations are proposed to contribute to Parksinsonism through effects such as increased alpha synulcein level.

PD is thought to result from a complex interaction between multiple genetic and environmental factors, though rare managerial forms of the disease do exist.

Mutations in 6 genes (SNCA, LRRK2, PRKN, DJ1, Pink1 and ATP13A2) have been shown to cause familial Parksinonsism.
In common variation in 3 genes (MAPT, LRRK1 and SNCA) and loss of function mutations in GBA have been well validated.

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Sign & Symptoms for Parkinson’s Disease

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Parkinsons Disease affects movement, producing motor symptoms, non-motor symptoms, which include autonomic dysfunction, neuro-psychiatric problems (mood, cognition, behavior or thought alterations) and sensory and sleep difficulties are also common.

Motor Symptoms:
There are four motor symptoms which are considered cardinal in Parkinson’s disease.

These four symptoms are
Tremor
Rigidity
Slowness of movement
Postural instability

Tremor:
This symptom is most apparent and well-known in 30% of patient with PD don’t have tremors at disease onset. Most develop it as the disease progresses. It is usually a rest tremor. Maximal when the limb is at rest and disappearing with voluntary movement and sleep.
It affects to a greater extent the most Distal pact of the limb and at the onset typically appears in only a single arm or leg, becoming bilateral later. Frequency of PD tremor is between 4-6 hertz cycles per second. Pill rolling tremor the tendency of the index finger of the and to get into contact with the thumb and perform together a circular movement.

Rigidity:
It is stiffness and resistance to limb movement caused by increased Muscle Tone, excessive and continuous contraction of muscles. Rigidity is uniform (Lead-pipe rigidity) or ratchet (Cogwheel rigidity). The combination f tremor and increased tone is considered to be at the origin of cogwheel rigidity. It may be associated with joint pains, frequent. In the beginning it is asymmetrical rigidity, neck is affected shoulder muscles prior to the muscles of the face and extremities. Rigidity affects the whole body and reduces the ability to move.

Hypokinesia (Slowness of movement):
It is associated with difficulties along the whole course of the movement process, from planning to initiation and finally execution of a movement. Performance of sequential and simultaneous movements is hindered. Bradykinesia is a very disabling symptom in the early stages of the disease. Initial complaints are problems when performing daily tests which require fine motor control like writing, sewing or getting dressed.

Clinical evaluation is based in similar tasks such as alternating movements between both hands or both feet.
Bradykinesia is not equal for all movement or times. It is modified by the action activity or emotional state of the subject, to the point that some people are barely able to walk yet can still ride a bicycle. Generally people with PD have less difficulty when some sort of external cue is provided.

Postural Instability:
It is seen in the last stage of disease, leading to impaired balance and frequent falls, then to bone fractures. Up to 40% may experience falls and around 10% may have falls weekly, with number of falls being related to severity.

Festinating (rapid shuffling steps and forward flexed pasture when walking, speech, swallowing disturbances, including voice disorder may be seen. Mask like face expression or small handwriting may seen.

Classification of Parkinson’s Disease

Parkinson's Disease

Parkinson’s Disease

Classification:

Parkinsonism word is used for a motor syndrome. The main symptoms are tremor at rest, stiffness, slowing of movement and postural instability.
Parkinsonian syndromes can be divided into four subtypes according to their origin:
1. Primary/Idiopathic
2. Secondary/Acquired
3. Hereditary P
4. Parkinson Plus Syndrome/ Multiple System Degeration

Primary Parkinsonism:
It means Parkinsonism with no external identifiable cause. In recent years several genes that are directly related to some causes of Parkinson’s Disease have been discovered.

The term Familial Parkinson’s Disease and Sporadic Parkinson’s Disease can be used to differentiate genetic from truly idiopathic forms of disease.

Usually classified as a movement disorder PD also gives rise to many non-motor types of symptoms like sensory deficits, cognitive difficulties or sleep problems.

Parkinson’s Plus Disease are primary Parkinsonism’s which present additional features. They include Multiple System Arophy, progressive supranuclear palsy, corticobasal degeneration and dementia with Lewy Bodies.

In terms of pathophysiological part, PD is considered a Synucleiopathy due to abnormal accumulation of alpha synuclein protein in the brain in the form of Lewy Bodies, as opposed to other disease such as Alzheimer’s Disease, where the brain accumulates Tan Protein in the form of Neurofibrollary Tangles.

The most typical symptoms of the Alzheimer’s Disease, dementia, occurs in advanced stages of PD, while it is common to find neurofibrillary tungles in brains affected by PD.

Dementia with Lewy Bodies (DLB) is another synucleiop that has similarities with PD, and especially with the subsets of PD cases with dementia.